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मैं तो केवल अपने माता-पिता का सेवक हूँ” बाबू ग्रोवर का भावुक उद्बोधन सुन नम हुईं आँखें*

मैं तो केवल अपने माता-पिता का सेवक हूँ” बाबू ग्रोवर का भावुक उद्बोधन सुन नम हुईं आँखें, 36वीं वर्षगांठ पर हृदय से व्यक्त किया आभार, हर सहयोगी को मंच से किया नमन

नीलकंठेश्वर भक्ति धाम की 36वीं वर्षगांठ के भव्य आयोजन के समापन अवसर पर जब आयोजक बाबू ग्रोवर मंच पर पहुँचे तो शब्दों से अधिक उनकी आँखें बोल रही थीं। वातावरण में भक्ति कृतज्ञता और पुत्रधर्म का अद्भुत संगम दिखाई दे रहा था। बाबू ग्रोवर ने अत्यंत विनम्र स्वर में कहा मैं कोई आयोजक नहीं केवल अपने माता-पिता का सेवक हूँ। यह जो कुछ भी हो रहा है वह उनकी दी हुई संस्कारों की पूँजी और भोलेनाथ की असीम कृपा का परिणाम है। मैंने जो भी किया उनकी खुशी के लिए किया। उनके इन शब्दों ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं के हृदय को छू लिया। एक पुत्र के रूप में अपने पिता द्वारा रखी गई धर्म की नींव को आगे बढ़ाने का संकल्प और माता-पिता के प्रति समर्पण का भाव उनके व्यक्तित्व को और भी ऊँचा बना दिया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि पुत्रभक्ति की सजीव प्रतिमा बन गया हो। उन्होंने कहा कि निलकंठेश्वर भक्ति धाम की यह यात्रा अकेले संभव नहीं थी।आप सभी का स्नेह आशीर्वाद और सहयोग ही हमारी शक्ति है। कहते हुए उन्होंने हाथ जोड़कर समस्त श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया। बाबू ग्रोवर ने विशेष रूप से पुलिस प्रशासन का सुरक्षा व्यवस्था हेतु, सजावट दल एवं अर्श टेंट हाउस का भव्य व्यवस्थाओं के लिए, पत्रकार बंधुओं का प्रचार-प्रसार हेतु, जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन व उपस्थिति के लिए तथा निलकंठेश्वर भक्ति धाम समिति और समस्त सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।उनकी वाणी में अहंकार नहीं केवल कृतज्ञता थी उनके शब्दों में प्रदर्शन नहीं केवल समर्पण था। समापन क्षणों में जब उन्होंने कहा यदि भोलेनाथ की कृपा और आप सभी का साथ बना रहा तो यह सेवा निरंतर चलती रहेगी। यह सुन पूरा पंडाल हर हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा।निलकंठेश्वर भक्ति धाम की यह वर्षगांठ केवल एक आयोजन नहीं रही बल्कि यह संदेश दे गई कि जब पुत्र अपने माता-पिता के संस्कारों को धर्म और सेवा के पथ पर आगे बढ़ाता है तब समाज के लिए प्रेरणा का दीपक प्रज्वलित होता है।

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