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कटनी में अवैध रेत खनन पर “निरीक्षण” या “आंखों में धूल”?

कलेक्टर श्री तिवारी के निर्देश पर अवैध खनन के विरुद्ध सघन जांच अभियान की खबरें जारी तो जारी कर दी गईं,
लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है!
बरही तहसील की बहिर्घटा खदान, बड़वारा तहसील की इमलिया–लादहर खदान (उमराड़) नदी, विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि लादहर खदान स्वीकृत ही नहीं हैं, फिर भी आज भी नदी की मुख्य धारा को मोड़कर बीच नदी में रैंप बने हुए हैं, आखिर खनिज विभाग ने अब तक एक भी रैंप क्यों नहीं हटवाया?
गुड़हा कला (विलायत कला) पावर हाउस के पास पूर्व ठेकेदार धनलक्ष्मी मर्चेंट का
आज भी हजारों ट्रक रेत का अवैध स्टॉक खुलेआम पड़ा है।
सवाल साफ है —
क्या यह सब प्रशासन की आंखों के सामने नहीं है?
या फिर अवैध रेत खनन माफियायों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है?
कटनी कलेक्टर एवं खनिज विभाग का मूकदर्शक होना किसी और ही तरफ इशारा करता है, और कई सवाल खड़े करता है, क्योंकि बात नदियों की है, पर्यावरण की है और कटनी जिले के जन-जीवन तथा भविष्य की है, जांच अभियान सिर्फ कागज़ों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समय की माँग है कि ठोस कदम उठाकर कड़ी कार्यवाही हो ताकि नदियों के साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित बचाया जा सके।

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