सलैया एथेनॉल प्लांट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, मजदूर की सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभाव की जांच की मांग

करीब दो माह पहले मजदूर के दोनों पैर कटने की सूचना, अपशिष्ट जल से तीन पेड़ सूखने का दावा; घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि और प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी

कटनी। जिले के सलैया स्थित एथेनॉल प्लांट की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ गंभीर सवाल सामने आए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्लांट में करीब दो से ढाई माह पहले एक मजदूर के साथ गंभीर दुर्घटना होने की बात कही जा रही है। वहीं, प्लांट से निकलने वाले कथित दूषित पानी के प्रभाव से आसपास के तीन हरे-भरे पेड़ों के सूखने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि, इन दोनों मामलों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन के साथ श्रमिकों की सुरक्षा, दुर्घटनाओं की पारदर्शी जानकारी और पर्यावरणीय मानकों का पालन भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में सलैया स्थित एथेनॉल प्लांट से जुड़ी इन चर्चाओं के बाद संबंधित विभागों की भूमिका और जांच की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं।

मजदूर के साथ गंभीर हादसे की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, लगभग दो से ढाई महीने पहले प्लांट में काम करने के दौरान एक मजदूर गंभीर दुर्घटना का शिकार हुआ था। दावा किया जा रहा है कि इस हादसे में मजदूर के दोनों पैर कट गए थे। बताया जाता है कि घायल मजदूर को उपचार के लिए जबलपुर भेजा गया था।

यदि यह जानकारी सही है, तो मामला श्रमिक सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत गंभीर है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, घायल श्रमिक को समय पर उपचार मिला या नहीं, और नियमानुसार उसके इलाज तथा मुआवजे के संबंध में क्या कदम उठाए गए।

साथ ही, दुर्घटना की सूचना संबंधित श्रम एवं औद्योगिक सुरक्षा अधिकारियों को दी गई थी या नहीं, इसकी भी पुष्टि की जानी चाहिए। फिलहाल, घटना के संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज अथवा विभागीय बयान सामने नहीं आया है।

अपशिष्ट जल और पेड़ों के सूखने का दावा

प्लांट की कार्यप्रणाली को लेकर दूसरा सवाल पर्यावरण से जुड़ा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि प्लांट से निकलने वाले कथित काले या दूषित पानी के प्रभाव से आसपास मौजूद तीन हरे-भरे पेड़ सूख गए हैं।

हालांकि, केवल पेड़ों के सूखने के आधार पर पानी को जहरीला या उसके कारणों को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित स्थान का निरीक्षण, पानी के नमूनों की प्रयोगशाला जांच और पेड़ों के सूखने के कारणों का वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक है।

यदि जांच में अपशिष्ट जल के अनुचित निस्तारण अथवा पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित विभागों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। इसके लिए पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

प्रबंधन और संबंधित विभागों से अपेक्षित जवाब

इस पूरे मामले में प्लांट प्रबंधन का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था, दुर्घटना संबंधी रिकॉर्ड, घायल कर्मचारी के उपचार एवं मुआवजे की स्थिति और अपशिष्ट जल के निस्तारण की व्यवस्था को लेकर प्रबंधन से जानकारी ली जानी चाहिए।

वहीं, संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्लांट का निरीक्षण कब किया गया, सुरक्षा एवं पर्यावरणीय मानकों के पालन की स्थिति क्या है और सामने आए आरोपों की जांच की जाएगी या नहीं।

जांच से ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति

सलैया एथेनॉल प्लांट से जुड़ी इन चर्चाओं की सच्चाई जानने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। एक ओर श्रमिक के साथ कथित गंभीर दुर्घटना की वास्तविकता सामने आनी चाहिए, तो दूसरी ओर पेड़ों के सूखने और दूषित पानी के दावे की वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए।

बहरहाल, इन मामलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्लांट प्रबंधन का पक्ष भी प्राप्त नहीं हुआ है, प्रबंधन से कोई तथ्यात्मक जानकारी या स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। जांच के निष्कर्ष ही स्पष्ट कर सकेंगे कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

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