कटनी – कॉमर्शियल वाहनों में भार क्षमता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है…
एक तरफ सरकार के खनिज विभाग का पोर्टल गाड़ियों को उनकी निर्धारित क्षमता से ज्यादा भार की टी पी काटने की अनुमति दे रहा है…
तो दूसरी तरफ वही गाड़ियां सड़क पर निकलते ही यातायात और माइनिंग विभाग के लिए अवैध यानि ओवरलोड घोषित हो जातीं हैं…
आखिर ये सिस्टम की गलती है या ट्रक मालिकों के साथ अन्याय…
कॉमर्शियल वाहनों के मालिक इन दिनों भारी असमंजस में हैं…
क्योंकि जिस गाड़ी की वैधानिक भार क्षमता तय है… उसी गाड़ी पर खनिज विभाग का पोर्टल अधिक भार की अनुमति दे देता है…
उदाहरण के तौर पर…
अगर 10 चक्का टिपर की क्षमता 25 टन है…
तो पोर्टल से 30 या 50 टन तक की टी पी जारी हो जाती है…
लेकिन जैसे ही यही वाहन सड़क पर आता है…
माइनिंग विभाग उसे ओवरलोड मानकर चालान कर देता है…
यानी एक ही सिस्टम… एक तरफ अनुमति देता है… और दूसरी तरफ उसी आधार पर कार्यवाही भी करता है…
ऐसे में ट्रक मालिक सवाल उठा रहे हैं कि अगर यह प्रशासनिक गलती है…
तो इसकी सजा आखिर उन्हें क्यों भुगतनी पड़ रही है?
ट्रक मालिकों का कहना है कि…
जब पोर्टल में टी पी जारी करते समय उक्त वाहन का नंबर साफ-साफ दर्ज होता है…
तो फिर ज्यादा भार की अनुमति देना और बाद में चालान करना…
पूरी तरह दोहरे रवैये को दर्शाता है…
प्रशासन ये अच्छी तरह जानता है, कि निर्धारित की गई भार क्षमता गलत है, क्योंकि उक्त वाहन की कंपनी द्वारा बनाई गई बॉडी की क्षमता निर्धारण से अधिक है, और निर्धारित भार के अनुसार व्यापार करना घाटे का काम है। बस यही बात भ्रष्टाचार को भी जन्म देती है और वाहन मालिक सड़क पर लुट रहा है।
अब सवाल ये है…
क्या प्रशासन इस सिस्टम की खामी को सुधारेगा…
या फिर ट्रक मालिक इसी तरह दोहरी मार झेलते रहेंगे?
