
विजयराघवगढ़ में कर्मयोगी नेता पंडित सत्कर्मयोगी नेता पंडित सत्येंद्र पाठक ‘बाबू जी’ की पुण्यतिथि भावपूर्णयेंद्र पाठक ‘बाबू जी’ की पुण्यतिथि भावपूर्ण वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके योगदान को याद किया गया।
पंडित सत्येंद्र पाठक जी की पुण्यतिथि केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उन यादों का संकलन है जो आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। अपने जीवनकाल में उन्होंने समाज सेवा, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में जो कार्य किए, वे आज भी मिसाल माने जाते हैं।
उन्होंने न सिर्फ हजारों लोगों को रोजगार के अवसर दिलाए, बल्कि जरूरतमंद परिवारों की मदद, बेटियों के विवाह में सहयोग और समाज के कमजोर वर्ग को सम्मानजनक जीवन देने का कार्य भी किया। यही कारण है कि लोग उन्हें सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि अपने विश्वास और सहारे के रूप में याद करते हैं।
“वो नाम नहीं, विश्वास थे… जहाँ अंधेरा होता था, वहाँ बाबू जी प्रकाश बनकर खड़े रहते थे।”
राजनीति के साथ-साथ उन्होंने अपने पारिवारिक दायित्वों को भी आदर्श रूप में निभाया। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती निर्मला पाठक ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया और परिवार को मजबूत संस्कार दिए।
अपने अंतिम समय में उन्होंने अपने पुत्र संजय पाठक को क्षेत्र की सेवा का दायित्व सौंपा, जिसे संजय पाठक आज पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
“जो दीप बाबू जी ने जलाया, वो आज भी सेवा के रूप में जल रहा है।”
विजयराघवगढ़ से लेकर आसपास के क्षेत्रों में आज भी संजय पाठक उसी समर्पण के साथ लोगों के सुख-दुख में सहभागी बने हुए हैं।
पंडित सत्येंद्र पाठक जी का जीवन समाज सेवा और समर्पण का ऐसा उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। उनकी यादें और उनके कार्य क्षेत्र के लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।
