
कटनी : मध्य प्रदेश में सी एम हेल्पलाइन के निराकरण में टॉप रैंकिंग और ए-ग्रेड का तमगा लेने वाली कटनी नगर निगम की जमीनी हकीकत अब सवालों के घेरे में है। शिवनगर में एक ऐसा मुख्य नाला बनाया गया है जिसने पिछले चार महीनों से करीब 20 हजार लोगों के एकलौते आवागमन के मार्ग को बाधित कर रखा है। महापौर के निरीक्षण, आश्वासन और मीडिया में लगातार खबरें प्रसारित होने के बावजूद न तो नाला सुधरा और न ही सड़क बनी। जिसकी कई सी एम हेल्पलाइन भी लगाई जा चुकी हैं, जिनका निराकरण अब तक लंबित है, अब जनता पूछ रही है — आखिर ये तमगा कैसे मिला और विकास का पैसा गया कहां?
शिवनगर में निर्मित यह कथित “विकास” अब लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन चुका है। बेढ़ंगे तरीके से बनाए गए मुख्य नाले ने पूरे क्षेत्र के इकलौते मार्ग से आवाजाही ठप कर दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले चार महीनों से हजारों लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं, नाला लबालब भरे हुए हैं, बोर से गंदा पानी आ रहा है, लेकिन नगर निगम प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
हैरानी की बात यह है कि महापौर कई बार स्थल का भ्रमण कर चुकी हैं, नाले को फेल घोषित कर दोबारा नाला और सड़क निर्माण का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन बारिश सिर पर आने के बावजूद काम अब तक अधूरा पड़ा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर के कई वार्डों में सिर्फ नारियल फोड़कर भूमि पूजन कर दिया जाता है, फोटो खिंच जाती है, सुर्खियां बन जाती हैं और फिर विकास कार्यों को लावारिस छोड़ दिया जाता है।
मीडिया में कई बार खबरें प्रसारित होने के बाद भी निगम प्रशासन की चुप्पी लोगों के गुस्से को और बढ़ा रही है। जनता का आरोप है कि ए-ग्रेड और रैंकिंग का ढोल पीटने वाला निगम जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुका है।
अब सवाल यही उठ रहा है कि जब शहर की जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है, तो आखिर यह रैंकिंग किस बात की है और कैसे हासिल की गई है? जनता अपनी पाई-पाई का हिसाब मांग रही है और पूँछ रही है कि विकास सिर्फ कागजों में हुआ है या धरातल पर भी दिखाई देगा।
