
कटनी। जिले के थानों की कार्यप्रणाली को लेकर पुलिस विभाग द्वारा जुलाई 2026 की जनसंतुष्टि आधारित रैंकिंग जारी की गई है। विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक महिला थाना 97.44 प्रतिशत संतुष्टि के साथ पहले स्थान पर है। बहोरीबंद थाना 91.22 प्रतिशत के साथ दूसरे, बाकल थाना 91.20 प्रतिशत के साथ तीसरे और कैमोर थाना 90.94 प्रतिशत संतुष्टि के साथ चौथे स्थान पर है।
हालांकि, विभाग की ओर से जारी रैंकिंग और थानों की धरातलीय स्थिति को लेकर आमजन के अनुभवों के बीच कितना सामंजस्य है, यह अपने आप में जांच और चर्चा का विषय हो सकता है। महज विभागीय आंकड़ों के आधार पर किसी थाने की वास्तविक कार्यप्रणाली का पूरा आकलन किया जाना संभव नहीं है। ऐसे में जनसंतुष्टि के इन आंकड़ों को लेकर आम नागरिकों की राय और जमीनी अनुभव भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
फीडबैक के आधार पर तैयार हुई रैंकिंग
पुलिस विभाग के मुताबिक यह रैंकिंग थानों में आने वाले फरियादियों और आगंतुकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर तैयार की गई है। इसके लिए आगंतुक रजिस्टर में दर्ज टिप्पणियों के साथ डिजिटल स्कैनर के माध्यम से प्राप्त ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं को आधार बनाया गया। विभाग का कहना है कि फीडबैक की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा क्रॉस कॉलिंग के माध्यम से प्रतिक्रियाओं की पुष्टि भी की गई।
बड़वारा, माधवनगर और ढीमरखेड़ा निचली रैंकिंग में
विभाग द्वारा जारी सूची में बड़वारा, माधवनगर और ढीमरखेड़ा थाने निचली रैंकिंग वाले थानों में शामिल हैं। हालांकि प्रेस नोट में इन तीनों थानों के सटीक संतुष्टि प्रतिशत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
पुलिस अधीक्षक ने सभी थाना प्रभारियों को नागरिकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने, शिकायतों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण करने तथा जनसंतुष्टि का स्तर लगातार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
रैंकिंग पर उठ सकता है बड़ा सवाल
जनसंतुष्टि की यह रैंकिंग निश्चित तौर पर पुलिस विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए फीडबैक पर आधारित है, लेकिन जनता की वास्तविक संतुष्टि का पैमाना केवल रजिस्टर या डिजिटल फीडबैक तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शिकायतकर्ताओं के अनुभव, शिकायतों के निराकरण की गुणवत्ता, लंबित मामलों की स्थिति और पुलिस की कार्यशैली जैसे पहलुओं से भी इसे परखा जा सकता है।
फिलहाल विभागीय आंकड़ों में महिला थाना सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला थाना बताया गया है, जबकि बड़वारा, माधवनगर और ढीमरखेड़ा निचली रैंकिंग में हैं। अब देखने वाली बात होगी कि विभाग की इस रैंकिंग और आमजन के धरातलीय अनुभवों में कितना अंतर या सामंजस्य सामने आता है।
