
लंबित जांचों, विभागीय नोटिस और सेवा रिकॉर्ड का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री-कृषि मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत
कटनी/भोपाल । कृषि अभियांत्रिकी विभाग, कटनी में पदस्थ उपयंत्री संदीप पीपड़ा की जुलाई 2026 में हुई पदोन्नति को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री, किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री, मुख्य सचिव सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजकर पदोन्नति आदेश की समीक्षा कर उसे निरस्त करने तथा अधिकारी को निलंबित किए जाने की मांग की है। शिकायत में अधिकारी के विरुद्ध विभिन्न स्तरों पर लंबित जांचों, विभागीय कार्यवाही और पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिसों का हवाला देते हुए पदोन्नति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड में गंभीर प्रकृति के प्रकरण और विभागीय जांचें लंबित होने के बावजूद उन्हें उच्च पद पर पदोन्नति दी गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। पदोन्नति प्रक्रिया में संबंधित रिकॉर्ड DPC के समक्ष किस रूप में प्रस्तुत किया गया और शासन स्तर पर क्या परीक्षण किया गया, यह जांच का विषय है।
13 जुलाई 2026 के पदोन्नति आदेश पर आपत्ति
शिकायत में कृषि विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक 1/1/3/0003/2026-Sec-1-14 (AGR), भोपाल, दिनांक 13 जुलाई 2026 का उल्लेख करते हुए पदोन्नति को चुनौती दी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि गंभीर शिकायतों और विभिन्न जांचों के लंबित रहने की स्थिति में पदोन्नति दिए जाने से प्रशासनिक पारदर्शिता तथा सेवा नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
शिकायतकर्ता ने शासन से यह स्पष्ट कराने की मांग की है कि पदोन्नति से पहले संबंधित अधिकारी के विरुद्ध लंबित विभागीय एवं कानूनी मामलों की जानकारी विभागीय पदोन्नति समिति के समक्ष रखी गई थी या नहीं।
POSH Act के तहत जांच का हवाला
शिकायत में कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित POSH Act, 2013 के तहत चल रही जांच का भी उल्लेख किया गया है। इसमें जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास, कटनी के कार्यालय के पत्र क्रमांक मवावि/स्था.स./2025/4348, दिनांक 30 दिसंबर 2025 के आधार पर गठित स्थानीय परिवाद समिति के समक्ष शिकायत लंबित होने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता ने इस जांच को अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए पदोन्नति प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की मांग की है।
जातिगत प्रताड़ना और धमकी के आरोपों का भी उल्लेख
शिकायत में अजाक पुलिस तथा मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के समक्ष लंबित मामलों का भी हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, महिला अधिकारी के साथ कथित जातिगत प्रताड़ना तथा वरिष्ठ अधिकारियों को धमकी दिए जाने संबंधी आरोपों की जांच विभिन्न स्तरों पर चल रही है।
शिकायत में कार्यालय उप पुलिस अधीक्षक, अजाक, जिला कटनी के 24 मार्च 2026 के पत्र तथा मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के प्रकरण क्रमांक 7075/माआ/विशा/0578/कटनी/26, दिनांक 18 मार्च 2026 का उल्लेख किया गया है। इन आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित जांचों और सक्षम प्राधिकारियों के निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट होगी।
करीब 40 कारण बताओ नोटिस जारी होने का दावा
शिकायतकर्ता ने वर्ष 2017 से 2026 के बीच अधिकारी को करीब 40 कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने का दावा किया है। इनमें अनधिकृत रूप से कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने, शासकीय राशि के अग्रिम भुगतान से संबंधित अनियमितता, हाजिरी रजिस्टर में कथित हेरफेर तथा कृषि विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में लापरवाही जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कुछ मामलों में संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ तथा कलेक्टर कार्यालय, कटनी की ओर से भी सिविल सेवा नियमों के उल्लंघन को लेकर अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
DPC की प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ता ने पदोन्नति के लिए गठित विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि अधिकारी के विरुद्ध लंबित मामलों और प्रतिकूल सेवा रिकॉर्ड की जानकारी DPC के समक्ष पूरी तरह प्रस्तुत नहीं की गई, जिसके कारण पदोन्नति का निर्णय प्रभावित हुआ।
हालांकि, यह आरोप भी जांच का विषय है। संबंधित विभागीय दस्तावेज, DPC की कार्यवाही और पदोन्नति के समय उपलब्ध सेवा अभिलेख सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियमों के अनुसार सभी तथ्यों पर विचार किया गया था या नहीं।
शिकायतकर्ता की तीन प्रमुख मांगें
शिकायतकर्ता ने शासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, संदीप पीपड़ा के पदोन्नति आदेश की समीक्षा कर उसे निरस्त किया जाए। दूसरी, यदि DPC के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने या गलत जानकारी प्रस्तुत करने की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच के साथ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। तीसरी, लंबित जांचों को प्रभावित होने से रोकने के लिए संदीप पीपड़ा को तत्काल निलंबित कर उनका मुख्यालय अन्यत्र निर्धारित किया जाए।
जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट
पूरे मामले में फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप और उपलब्ध कराए गए दस्तावेज ही सामने आए हैं। आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन संबंधित विभागीय जांच, पुलिस जांच, सक्षम समिति तथा शासन स्तर पर होने वाली जांच के निष्कर्षों से होगा। ऐसे में पदोन्नति को लेकर उठे सवालों के बीच अब कृषि विभाग और शासन की ओर से इस शिकायत पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजर है।
