
कटनी : शहर के विकास के दावे और करोड़ों के बजट… लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कह रही है? कहीं नागरिक रोड, नालियों जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं, तो कहीं बन भी जाएं तो उनकी बनावट पर प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं, निगम प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। शिव नगर में नवनिर्मित नाली इसका जीता जागता और एकदम ताज़ा उदाहरण है, बारिश सामने है, लेकिन निगम प्रशासन सुध ही नहीं ले रहा है, वो सिर्फ नई-नई स्वीकृतियों और केवल भूमिपूजनों में व्यस्त है या यूँ कहें कि शेष कार्यकाल की अल्पावधि में अधिक से अधिक भूमिपूजनों को कर डालने की हड़बड़ी सी है, गत या धराशायी हो चुकी योजनाओं की तरफ देखने की फुर्सत ही नहीं है।
कटनी के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल मिशन चौक और बस स्टैंड की सड़कों में व्याप्त गड्ढे इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। बड़े-बड़े गड्ढे, सड़क पर बहता पानी और हर पल मंडराता हादसों का खतरा… आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे? दौरे हो जाते हैं, गड्ढे वहीं रह जाते है।
कटनी नगर निगम शहर के विकास और बेहतर सड़कों के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन शहर की कई प्रमुख सड़कें आज भी बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं।
मिशन चौक और बस स्टैंड जैसे अति व्यस्त इलाकों में सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे लोगों की परेशानी का कारण बने हुए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि यहां लगे हैंडपंप से लगातार बहता पानी सड़क को और अधिक क्षतिग्रस्त कर रहा है, नालियां खुली हुई हैं।
हर दिन हजारों वाहन चालक और राहगीर इन रास्तों से गुजरते हैं, लेकिन लंबे समय से मौजूद इन गड्ढों की मरम्मत नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बाइक और ऑटो चालक यहां फिसलकर घायल हो चुके हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
बरसात का मौसम दस्तक दे चुका है और ऐसे में सड़क पर भरे पानी के बीच ये गड्ढे और भी खतरनाक साबित हो सकते हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए ये रास्ते किसी जोखिम से कम नहीं है।
नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार :-
“सड़क में लंबे समय से गड्ढे हैं। पानी भरा रहने से उनकी गहराई दिखाई नहीं देती। कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। नगर निगम को तत्काल मरम्मत करानी चाहिए।”
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नगर निगम प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? या फिर जनसुरक्षा से जुड़े ऐसे मुद्दे सिर्फ बैठकों, निरीक्षणों और फाइलों तक ही सीमित रह जाएंगे? नगरवासियों को अब सिर्फ इंतजार है कि जिम्मेदार जन प्रतिनिधि एवं अधिकारी इन समस्याओं पर जल्द संज्ञान लें और लोगों को राहत दें।
