
एक कि.मी पैदल चले, फिर एसपी को पीछे बैठाकर करीब दो किमी मोटरसाइकिल से देखा बदहाल मार्ग; पक्की सड़क के लिए स्टीमेट बनाने के निर्देश
कटनी। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत ढीमरखेड़ा तहसील के ग्राम पंचायत अतरसूमा के ग्राम हल्का में ग्रामीणों की सड़क संबंधी समस्या सुनने के बाद कलेक्टर आशीष तिवारी ने अधिकारियों को केवल निर्देश देने के बजाय स्वयं मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों की समस्या जानने के बाद कलेक्टर ने सहजता से कहा—“चलिए, चलकर देखते हैं।”कलेक्टर पहले ग्रामीणों के साथ करीब एक किलोमीटर पैदल चले और सड़क की स्थिति को करीब से देखा। इसके बाद आगे का मार्ग मोटरसाइकिल से तय करने का निर्णय लिया। कलेक्टर ने स्वयं बाइक चलाते हुए पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा को पीछे बैठाया और बोंदा तिराहा से बसहरा मार्ग की ओर करीब दो किलोमीटर तक मोटरसाइकिल से पहुंचकर सड़क का निरीक्षण किया।दरअसल, ग्राम पंचायत सिलौंडी में आयोजित जन-विश्वास अभियान के शिविर में पहुंचने से पहले संभागायुक्त, कलेक्टर, एसपी, डीएफओ और जिला पंचायत सीईओ आसपास के गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों की समस्याओं की जानकारी ले रहे थे। इसी दौरान ग्राम हल्का में बोंदा तिराहा के पास ग्रामीणों ने बताया कि बोंदा तिराहा से बसहरा तक का मार्ग मिट्टी और मुरूम से बना है। बारिश के दौरान मुरूम बह जाने और जगह-जगह कीचड़ हो जाने से ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी होती है।ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद कलेक्टर ने मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखने का निर्णय लिया। उन्होंने पहले करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर मार्ग का जायजा लिया और फिर मोटरसाइकिल से आगे के लगभग दो किलोमीटर रास्ते का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सड़क की स्थिति और ग्रामीणों को होने वाली परेशानियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा।निरीक्षण के बाद कलेक्टर आशीष तिवारी ने संबंधित अधिकारियों को बोंदा तिराहा से बसहरा मार्ग को पक्की सड़क के रूप में विकसित करने के लिए स्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए।कलेक्टर की बाइक देखने उमड़े ग्रामीणकलेक्टर और एसपी के मोटरसाइकिल से सड़क का निरीक्षण करने की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। जिस सड़क पर ग्रामीण लंबे समय से आवागमन की परेशानी झेल रहे हैं, उसी मार्ग पर कलेक्टर का स्वयं बाइक चलाकर निरीक्षण करना ग्रामीणों के लिए चर्चा का विषय बन गया। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं भी अधिकारियों के सामने रखीं।
