
कटनी। बाल गंगाधर तिलक वार्ड क्रमांक-1 के इंदिरा नगर गली नंबर-6 में सफाई व्यवस्था की जमीनी हकीकत नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। यहां सार्वजनिक हैंडपंप के आसपास गंदगी और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। नालियों के जाम होने के कारण गंदा पानी हैंडपंप के चारों ओर जमा है। ऐसे में इसी हैंडपंप का पानी स्थानीय लोग पीने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे दूषित पानी के कारण संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय स्तर पर सफाई व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वार्ड में तैनात सफाई अमला नियमित रूप से मौके पर दिखाई नहीं देता। वार्ड हवलदार के भी महज औपचारिकता पूरी करने के लिए वार्ड में आने और उपस्थिति दर्ज कर वापस लौट जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ कर्मचारी मौके पर पहुंचे बिना ही उनकी उपस्थिति दर्ज किए जाने की स्थिति भी बनी रहती है।
हैंडपंप के आसपास गंदगी, बीमारी का खतरा
सबसे चिंताजनक स्थिति सार्वजनिक हैंडपंप के आसपास है। जहां लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिए, वहीं उसके चारों ओर गंदा पानी और गंदगी का जमावड़ा दिखाई दे रहा है। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से पानी की निकासी प्रभावित है और गंदा पानी हैंडपंप के आसपास जमा हो रहा है। यदि समय रहते सफाई और जल निकासी की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो दूषित वातावरण का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
कागजों में सफाई, जमीन पर बदहाली?
सवाल यह भी है कि यदि नगर निगम द्वारा वार्ड में नियमित सफाई व्यवस्था और सफाई मित्रों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है, तो फिर सार्वजनिक हैंडपंप और नालियों की यह स्थिति क्यों बनी हुई है? क्या सफाई व्यवस्था की निगरानी केवल उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित रह गई है? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए और केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर व्यवस्था को दुरुस्त मानने के बजाय जमीनी स्तर पर निगरानी करनी चाहिए।
तत्काल सफाई और नाली की सफाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन, स्वास्थ्य अमले और जल विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। हैंडपंप के आसपास जमा गंदे पानी की निकासी, जाम नालियों की सफाई, क्षेत्र में नियमित सफाई और पेयजल स्रोत की स्वच्छता सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है। साथ ही सफाई कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि जिम्मेदारी केवल कागजों में पूरी न हो।
नगर निगम के सामने अब सवाल यही है कि जब सार्वजनिक पेयजल स्रोत के आसपास ही गंदगी और गंदे पानी का जमाव है, तो शहर की सफाई व्यवस्था को आखिर किस आधार पर बेहतर माना जाए?
