मध्यप्रदेश से एक बड़ी और राहतभरी खबर सामने आई है, जहां मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
अब गेस्ट फैकल्टी और संविदा महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन से वंचित नहीं किया जा सकेगा। कोर्ट ने साफ कहा है कि मातृत्व लाभ कोई दया नहीं, बल्कि महिला का कानूनी और सामाजिक अधिकार है।
🎯 क्या है पूरा मामला?
यह मामला कटनी के शासकीय तिलक पीजी कॉलेज में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी डॉ. प्रीति साकेत से जुड़ा है। पहले कॉलेज प्रशासन ने उन्हें 6 महीने का सवेतन मातृत्व अवकाश दिया था, लेकिन बाद में 16 जून 2023 के आदेश में उनका मानदेय रोक दिया गया।
इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने महिला के पक्ष में बड़ा निर्णय सुनाया।
⚖️ कोर्ट का बड़ा फैसला
न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने आदेश दिया कि—
👉 गेस्ट फैकल्टी भी संस्थान की कर्मचारी मानी जाएंगी
👉 उन्हें 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश दिया जाए
👉 8 सप्ताह प्रसव पूर्व और 18 सप्ताह प्रसव पश्चात अवकाश अनिवार्य होगा
👉 पूरी अवधि का वेतन/मानदेय देना होगा
साथ ही कोर्ट ने 16 जून 2023 के संशोधित आदेश को निरस्त कर दिया।
📜 कानून का हवाला
अदालत ने Maternity Benefit Act, 1961 का हवाला देते हुए कहा कि संविदा या अस्थायी नियुक्ति मातृत्व लाभ से वंचित करने का आधार नहीं हो सकती।
💡 80 दिन की शर्त पर भी राहत
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 80 दिन कार्य करने की शर्त को सरकारी संस्थानों में कठोरता से लागू नहीं किया जा सकता।
📌 क्यों अहम है यह फैसला?
यह निर्णय प्रदेश की हजारों महिला गेस्ट फैकल्टी और संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
कोर्ट ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि मातृत्व संरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे किसी भी प्रशासनिक आदेश के जरिए छीना नहीं जा सकता।
👉 यह फैसला आने वाले समय में ऐसे मामलों के लिए मजबूत नजीर साबित होगा।
