कटनी : शहर के वार्ड नंबर 4 के शिवनगर में हाल ही में बना एक नवनिर्मित मुख्य नाला अब विवादों में घिर गया है। महापौर स्वयं शिकायत मिलने पर मौके पर पहुंचीं… और निरीक्षण के दौरान नाले को गलत बताते हुए उसमें सुधार के निर्देश दे दिए।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि…
👉 जब नाला बन रहा था, तब निगरानी कहां थी?
👉 आखिर 200 मीटर के छोटे से नाले को बनाने में 3 महीने का लंबा समय क्यों लगा?
👉 और जब बना… तो गलत कैसे हो गया?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाले का निर्माण पूरी तरह अव्यवस्थित और बिना तकनीकी समन्वय के किया गया है। नाले का लेवल सड़क से मेल नहीं खाता… जिससे पहले से ही सकरी सड़क अब और भी बदतर स्थिति में पहुंच गई है।
करीब 20 हजार की आबादी के लिए यह इकलौता मुख्य मार्ग है… लेकिन अब हालात ये हैं कि वाहनों का निकलना तक मुश्किल हो गया है। बीते 3 से 4 महीनों से रहवासी वैकल्पिक रास्तों से किसी तरह आवाजाही करने को मजबूर हैं, ज्ञातव्य हो कि जहां आगजनी की घटना पर फायर ब्रिगेड तक नहीं पहुंच पाएगी, गुंजाइश ही नहीं है! ना ही जरूरत में एम्बुलेंस ही आसानी से पहुंच पाएगी।
जबकि नगर निगम प्रशासन इस पूरी समस्या से बेखबर बना रहा।
बड़ा मुद्दा यह भी है कि सीवर लाइन योजना पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं,
सिर्फ नाला ही नहीं… शहर में चल रही करोड़ों की सीवर लाइन परियोजना पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
👉 पाया गया है कि शहर में कई वार्डो में सीवर चैंबर के मुहानों को ऊपर से ढककर सड़कों का निर्माण कर दिया गया है…
👉 जिससे पूरी योजना की उपयोगिता ही संदेह के घेरे में आ गई है…
अगर योजना बेकार है… तो करोड़ों रुपये क्यों खर्च हो रहे हैं?
और अगर योजना जरूरी है… तो इस तरह की लापरवाही क्यों?
अब बड़ा सवाल यह है कि…
क्या सिर्फ निरीक्षण और आश्वासन से समस्या हल हो जाएगी? या फिर इतनी बड़ी आबादी में बसे लोगों की समस्याओं के निराकरण पर भी विचार किया जाएगा और दोषियों पर कार्यवाही भी की जाएगी ।
