
खाड़ी देशों में जारी युद्ध संकट का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ सीएनजी और दूध के दाम भी बढ़ गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में रोजमर्रा की कई वस्तुएं महंगी होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि लोग पहले से ही इस बढ़ोतरी के लिए मानसिक रूप से तैयार नजर आ रहे थे।अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच देश में पेट्रोल और डीजल महंगा हो गया है। इसके साथ ही सीएनजी और दूध के दाम बढ़ने से आम आदमी का मासिक बजट प्रभावित होने लगा है। वाहन चालकों और मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर जल्द ही परिवहन और बाजार पर दिखाई देगा। माल भाड़ा बढ़ने से फल, सब्जी, किराना और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। यानी आने वाले समय में महंगाई का दायरा और बढ़ने की संभावना है।हालांकि खाड़ी देशों में जारी तनाव को देखते हुए लोग पहले से ही कीमतें बढ़ने के कयास लगा रहे थे। कई लोगों का कहना है कि अब जरूरत है फिजूल खर्च पर नियंत्रण रखने और पेट्रोल-डीजल की बचत करने की। लोग सार्वजनिक परिवहन और जरूरी यात्राओं तक सीमित रहने की बात भी कह रहे हैं।खाड़ी संकट का असर अब सीधे आम आदमी की जेब तक पहुंच गया है। ऐसे में महंगाई के इस दौर में लोगों को अपनी जरूरतों और खर्चों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।
