
‘मेरे सपनों का भारत’ चित्रकला प्रतियोगिता में 53 विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा, निकिता बर्मन प्रथम
कटनी, 19 सितंबर। कागज पर बिखरे रंगों में किसी ने स्वच्छ शहर की तस्वीर उकेरी तो किसी ने हरियाली, आधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भर भारत का सपना सजाया। किसी चित्र में बेहतर शिक्षा और विकास की झलक दिखाई दी तो किसी ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। अवसर था नगर निगम कटनी द्वारा ‘सेवा से संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित ‘मेरे सपनों का भारत’ चित्रकला प्रतियोगिता का।साधुराम स्कूल परिसर में आयोजित इस प्रतियोगिता में नगर निगम के तीनों विद्यालयों के कुल 53 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशक्ति को रंगों और रेखाओं के माध्यम से कागज पर उतारते हुए स्वच्छ, विकसित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जागरूक भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की।
तीन विद्यालयों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
प्रतियोगिता में साधुराम स्कूल के 15, के.सी.एस. उच्चतर माध्यमिक शाला के 20 तथा ए. रविंद्र राव स्कूल के 18 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों की रचनात्मकता और विषय के प्रति उनकी समझ देखने को मिली। बच्चों ने अपने चित्रों के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि वे आने वाले भारत को किस रूप में देखना चाहते हैं।
निकिता बर्मन ने हासिल किया पहला स्थानप्रतियोगिता के परिणाम में के.सी.एस. उच्चतर माध्यमिक शाला की निकिता बर्मन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। साधुराम स्कूल के प्रांशु द्वितीय तथा ए. रविंद्र राव स्कूल के दीपू चौधरी तृतीय स्थान पर रहे। वहीं साधुराम स्कूल के अमित सिंह एवं ए. रविंद्र राव स्कूल की आँचल चौधरी को सांत्वना स्थान प्राप्त हुआ।
महापौर ने बढ़ाया विद्यार्थियों का उत्साह
कार्यक्रम के दौरान महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और उनकी रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने बच्चों को अपनी प्रतिभा को निरंतर निखारने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम में संचालनालय से पधारे अधिकारी ओ.पी. झा, सहायक यंत्री आदेश जैन, उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी सहित तीनों विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
चित्रों में दिखी नई पीढ़ी की सोच
प्रतियोगिता में बनाए गए चित्रों ने बच्चों की कल्पनाशक्ति के साथ-साथ देश के भविष्य को लेकर उनकी सोच को भी सामने रखा। स्वच्छता, पर्यावरण, शिक्षा, तकनीक, विकास और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को बच्चों ने अपनी कला के जरिए अभिव्यक्त किया। इस तरह प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए केवल रंग भरने का अवसर नहीं रही, बल्कि अपने सपनों के भारत की तस्वीर प्रस्तुत करने का मंच भी बनी।
