
कटनी। स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के नाम पर नगर निगम द्वारा हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर के कई क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जगह-जगह खुले में फेंका जा रहा घरेलू एवं अपशिष्ट कचरा न केवल शहर की सुंदरता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
शहर के विभिन्न वार्डों और सार्वजनिक स्थलों पर देखने में आ रहा है कि घरों से निकलने वाला कचरा निर्धारित व्यवस्था के तहत एकत्रित होने के बजाय खुले स्थानों, सड़कों के किनारे और खाली पड़ी जमीनों पर फेंका जा रहा है। इन स्थानों पर जमा कचरे को आवारा पशु और कुत्ते इधर-उधर फैलाकर गंदगी को और बढ़ा देते हैं। परिणामस्वरूप पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैलती है और स्वच्छता व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
बारिश में बढ़ रहा संक्रमण का खतरा
मानसून के आगमन के साथ यह समस्या और गंभीर रूप धारण कर रही है। खुले में पड़ा कचरा बारिश के पानी में सड़ने लगता है, जिससे मच्छरों, मक्खियों और अन्य रोग फैलाने वाले जीवों की संख्या बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी परिस्थितियां डेंगू, मलेरिया, टायफाइड, दस्त और त्वचा संबंधी बीमारियों के प्रसार का कारण बन सकती हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई क्षेत्रों में नियमित रूप से कचरा वाहन नहीं पहुंचते, जिसके कारण लोग मजबूरी में कचरा खुले स्थानों पर फेंक देते हैं। वहीं कुछ स्थानों पर कचरा वाहन पहुंचने के बावजूद लोग निर्धारित व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे हैं और सार्वजनिक स्थानों को कचरा घर बना रहे हैं।
जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
शहर में व्याप्त इस स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कचरा वाहन नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं तो यह नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल है, और यदि वाहन पहुंचने के बावजूद नागरिक खुले में कचरा फेंक रहे हैं तो नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था की कमजोरी उजागर होती है।
कचरा प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक है कि नगर निगम द्वारा नियमित निगरानी की जाए, कचरा संग्रहण व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाया जाए तथा खुले में कचरा फेंकने वालों के विरुद्ध जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। स्वच्छता नियमों का सख्ती से पालन कराए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
करोड़ों का बजट, लेकिन परिणाम अपेक्षित नहीं
नगर निगम द्वारा स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के लिए प्रतिवर्ष भारी बजट खर्च किया जाता है। कचरा संग्रहण वाहनों, सफाई कर्मियों, प्रसंस्करण व्यवस्था और जनजागरूकता अभियानों पर बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यदि शहर में खुले में कचरा फेंकने और गंदगी फैलने की स्थिति बनी हुई है, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शहरवासियों का मानना है कि केवल बजट खर्च करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके परिणाम भी धरातल पर दिखाई देने चाहिए। यदि स्वच्छता व्यवस्था अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पा रही है, तो संबंधित अधिकारियों और कचरा प्रबंधन समिति की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
जनभागीदारी भी है जरूरी
स्वच्छ शहर का निर्माण केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों की सहभागिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कचरा निर्धारित वाहन में देना, गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखना तथा सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
निष्कर्ष
कटनी में कचरा प्रबंधन की मौजूदा स्थिति यह संकेत दे रही है कि स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है। नगर निगम को निगरानी, दंडात्मक कार्रवाई और कचरा संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, वहीं नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अन्यथा खुले में बिखरा कचरा आने वाले दिनों में शहर के लिए स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।
