नेहा पच्चीसिया प्रकरण में तीन आरोपी फरार, जमीन के नामांतरण पर भी उठे सवाल; राजस्व विभाग की भूमिका जांच के घेरे में

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कटनी। कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया से जुड़े बहुचर्चित जमीन प्रकरण में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया सहित तीन लोगों—क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी—के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद तीनों के फरार बताए जाने से मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर दबिश दे रही है।

मामले का केंद्र कटनी के कन्हवारा गांव की खसरा नंबर 2618/1 की करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन है। उपलब्ध जांच-संबंधी रिपोर्टों के मुताबिक इस जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत करीब 82 लाख 86 हजार 930 रुपये बताई गई है, जबकि आरोप है कि इसकी रजिस्ट्री महज 18.20 लाख रुपये में कराई गई। शिकायतकर्ता की ओर से जमीन का सौदा करीब 1.07 करोड़ रुपये में तय होने का भी दावा किया गया है।

15 अप्रैल की रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद

शिकायत के अनुसार 15 अप्रैल 2026 को जमीन की रजिस्ट्री मारूफ अहमद हनफी के नाम कराई गई। आरोप है कि रजिस्ट्री के समय 15 लाख रुपये का चेक और करीब 3.20 लाख रुपये नकद भुगतान दर्शाया गया, जबकि शेष राशि का भुगतान नहीं हुआ। जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई कि खरीददार मारूफ अहमद हनफी के खाते में 15 लाख रुपये क्षितिज राज बारापत्रे के खाते से पहुंचे थे।यही बैंक लेनदेन अब जांच का अहम बिंदु बन गया है—खरीदार के नाम जमीन, लेकिन खरीदी की रकम का एक बड़ा हिस्सा दूसरे व्यक्ति के खाते से क्यों आया? इस सवाल का स्पष्ट जवाब जांच में सामने आना बाकी है।

पुलिसिया दबाव के आरोप

शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि जमीन मालिक रमेश लोधी पर आपराधिक मामले का दबाव बनाया गया और इसी दबाव में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि रमेश लोधी को दो दिन तक CSP के आवास पर रखा गया तथा बाद में सरकारी वाहन से रजिस्ट्री कराने ले जाया गया। इन आरोपों की जांच के बाद ही इनकी पुष्टि या खंडन संभव होगा।

नामांतरण ने बढ़ाए सवाल

इस पूरे मामले में अब जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है।उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। दूसरी ओर, जमीन के मूल पक्ष ने नामांतरण पर आपत्ति भी दर्ज कराई थी।यहीं से राजस्व विभाग की भूमिका को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

बड़ा सवाल

अगर जमीन के स्वामित्व को लेकर आपत्ति दर्ज थी, भुगतान को लेकर विवाद था और मामला पुलिस एवं प्रशासन के संज्ञान में आ चुका था, तो

नामांतरण किस आधार पर हुआ?

नामांतरण आवेदन कब प्रस्तुत हुआ?

उस पर आपत्ति कब दर्ज हुई?

आपत्ति की सुनवाई किस राजस्व अधिकारी ने की?

नामांतरण आदेश किस तारीख को जारी हुआ?

क्या संबंधित पक्षों को विधिवत नोटिस दिया गया?

क्या रजिस्ट्री, भुगतान और आपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया गया?

और सबसे अहम—

क्या नामांतरण की प्रक्रिया सामान्य गति से हुई या असामान्य रूप से जल्दबाजी में पूरी की गई?

इन सवालों के जवाब संबंधित राजस्व रिकॉर्ड से ही सामने आ सकते हैं।

राजस्व विभाग की भूमिका अभी जांच का विषय

इस मामले में फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजस्व विभाग के किसी अधिकारी ने जान बूझकर गलत तरीके से नामांतरण किया। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में किसी विशिष्ट राजस्व अधिकारी के खिलाफ एफआईआर या दोष सिद्ध होने की पुष्टि नहीं है। लेकिन यदि रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि जमीन पर आपत्ति लंबित होने के बावजूद नामांतरण असामान्य जल्दबाजी में किया गया, अथवा जरूरी दस्तावेजों और आपत्तियों का विधिवत परीक्षण नहीं हुआ, तो नामांतरण प्रक्रिया में शामिल राजस्व अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच जरूरी हो सकती है। इसलिए अब जांच केवल पुलिस अधिकारी और जमीन खरीदार तक सीमित रहने के बजाय रजिस्ट्री से लेकर नामांतरण तक पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की जांच की मांग भी उठ सकती है।

तीनों आरोपी फरार, पुलिस की तलाश तेज

एफआईआर दर्ज होने के बाद नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के फरार होने की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमों को सक्रिय कर चुकी है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। एक टीम के राजस्थान पहुंचने की भी रिपोर्ट है। हालांकि, नेहा पच्चीसिया को अभी आधिकारिक रूप से न्यायालय द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। एफआईआर के बाद पुलिस ने नेहा पच्चीसिया के कार्यालय को सील कर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित करने की कार्यवाही भी की है। उनके कॉल डिटेल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। एफआईआर में कौन-कौन?कुठला थाने में दर्ज प्रकरण में मुख्य रूप से तीन नाम सामने आए हैं—

1. नेहा पच्चीसिया — तत्कालीन नगर पुलिस अधीक्षक,

कटनी2. क्षितिज राज बारापत्रे — जमीन के लेनदेन में धनराशि उपलब्ध कराने के आरोपों के चलते नाम सामने आया

3. मारूफ अहमद हनफी — जमीन के दस्तावेजों में खरीदार

रिपोर्टों के अनुसार तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

अब जांच की दिशा क्या होगी?

अब इस प्रकरण में केवल यह पता लगाना पर्याप्त नहीं होगा कि जमीन किसके नाम हुई। जांच के लिए कई कड़ियां महत्वपूर्ण हैं—रजिस्ट्री → भुगतान → बैंक ट्रांजेक्शन → जमीन पर आपत्ति → नामांतरण आवेदन → राजस्व जांच → नामांतरण आदेश → वर्तमान स्वामित्व।

इन सभी दस्तावेजों और तारीखों को जोड़ने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के सौदे में किसकी क्या भूमिका थी और नामांतरण प्रक्रिया नियमानुसार हुई या नहीं।

सबसे बड़ा सवाल

एक तरफ 82.86 लाख रुपये की सरकारी गाइडलाइन वाली जमीन, दूसरी तरफ 18.20 लाख रुपये की रजिस्ट्री; खरीददार के खाते में दूसरे व्यक्ति के खाते से रकम पहुंचना; जमीन मालिक की ओर से नामांतरण पर आपत्ति; और इसके बाद नामांतरण की प्रक्रिया—इन सभी कड़ियों को एक साथ रखकर जांच करना जरूरी है।

नेहा पच्चीसिया समेत तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना और उनका फरार बताया जाना पुलिस जांच का विषय है। वहीं नामांतरण की पूरी फाइल अब राजस्व विभाग की भूमिका को स्पष्ट करने वाली सबसे अहम कड़ी बन सकती है। यदि राजस्व रिकॉर्ड में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी, आपत्ति की अनदेखी अथवा असामान्य जल्दबाजी सामने आती है, तो उस स्तर पर जिम्मेदारी तय करना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

फिलहाल आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया से होनी है और राजस्व विभाग की भूमिका पर भी आधिकारिक जांच/दस्तावेज सामने आने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जाना उचित होगा।

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