सेवारत शिक्षकों की तीन सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने, प्रथम नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना और ई-अटेंडेंस ऐच्छिक करने की मांग
कटनी। सेवारत शिक्षकों से जुड़ी तीन प्रमुख मांगों को लेकर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश, जिला कटनी की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने, प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना किए जाने तथा ई-अटेंडेंस व्यवस्था को ऐच्छिक किए जाने की मांग की गई है।
2 अक्टूबर 2026 को जारी ज्ञापन में बताया गया है कि देशभर में वर्षों से सेवाएं दे रहे लाखों शिक्षकों के समक्ष शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के कारण असमंजस और सेवा संबंधी चिंता की स्थिति उत्पन्न हुई है। संगठन ने मुख्यमंत्री से इस विषय में केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्ताव भेजकर आवश्यक निर्णय कराने की मांग की है।
तीन सूत्रीय मांगें रखीं
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं।
पहली मांग में कहा गया है कि सेवारत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश लाया जाए। साथ ही आवश्यक वैधानिक संशोधन कर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए।
दूसरी मांग में शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना किए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन में इसी आधार पर ग्रेच्युटी एवं अवकाश नगदीकरण सहित पुरानी पेंशन बहाली की मांग भी रखी गई है।
तीसरी मांग के रूप में ई-अटेंडेंस व्यवस्था को ऐच्छिक किए जाने की मांग की गई है।
शिक्षकों के हितों से जुड़ा बताया मामला
ज्ञापन में संगठन की ओर से कहा गया है कि यह विषय केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य से जुड़ा हुआ है। संगठन ने केंद्र सरकार से संबंधित विषयों पर सकारात्मक एवं मानवीय निर्णय लेते हुए समस्याओं का स्थायी समाधान किए जाने की मांग की है।
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने की दिशा में शीघ्र पहल करते हुए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत मिल सके।
ज्ञापन माननीय अनुविभागीय अधिकारी, कटनी के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संबोधित किया गया है। ज्ञापन पर जे.पी. हल्दकार, जिला संयोजक एवं समस्त अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, कटनी के हस्ताक्षर दर्ज हैं।
मुख्य मांगें एक नजर में
सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना की जाए तथा ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण एवं पुरानी पेंशन बहाली का लाभ दिया जाए।
ई-अटेंडेंस व्यवस्था को ऐच्छिक किया जाए।सेवारत शिक्षकों की तीन सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन
शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने, प्रथम नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना और ई-अटेंडेंस ऐच्छिक करने की मांग
कटनी। सेवारत शिक्षकों से जुड़ी तीन प्रमुख मांगों को लेकर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश, जिला कटनी की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने, प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना किए जाने तथा ई-अटेंडेंस व्यवस्था को ऐच्छिक किए जाने की मांग की गई है।
2 अक्टूबर 2026 को जारी ज्ञापन में बताया गया है कि देशभर में वर्षों से सेवाएं दे रहे लाखों शिक्षकों के समक्ष शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के कारण असमंजस और सेवा संबंधी चिंता की स्थिति उत्पन्न हुई है। संगठन ने मुख्यमंत्री से इस विषय में केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्ताव भेजकर आवश्यक निर्णय कराने की मांग की है।
तीन सूत्रीय मांगें रखीं
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं।
पहली मांग में कहा गया है कि सेवारत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश लाया जाए। साथ ही आवश्यक वैधानिक संशोधन कर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए।
दूसरी मांग में शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना किए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन में इसी आधार पर ग्रेच्युटी एवं अवकाश नगदीकरण सहित पुरानी पेंशन बहाली की मांग भी रखी गई है।
तीसरी मांग के रूप में ई-अटेंडेंस व्यवस्था को ऐच्छिक किए जाने की मांग की गई है।
शिक्षकों के हितों से जुड़ा बताया मामला
ज्ञापन में संगठन की ओर से कहा गया है कि यह विषय केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य से जुड़ा हुआ है। संगठन ने केंद्र सरकार से संबंधित विषयों पर सकारात्मक एवं मानवीय निर्णय लेते हुए समस्याओं का स्थायी समाधान किए जाने की मांग की है।
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने की दिशा में शीघ्र पहल करते हुए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत मिल सके।
ज्ञापन माननीय अनुविभागीय अधिकारी, कटनी के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संबोधित किया गया है। ज्ञापन पर जे.पी. हल्दकार, जिला संयोजक एवं समस्त अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, कटनी के हस्ताक्षर दर्ज हैं।
मुख्य मांगें एक नजर में
सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना की जाए तथा ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण एवं पुरानी पेंशन बहाली का लाभ दिया जाए।
ई-अटेंडेंस व्यवस्था को ऐच्छिक किया जाए।

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