कटनी में यातायात व्यवस्था बेपटरी, ई-रिक्शा और अवैध पार्किंग के आगे बेबस व्यवस्था!

मिशन चौक से जगन्नाथ चौक तक तीन घंटे थमा रहा यातायात, आजाद चौक से मिशन चौक तक सड़कें बनीं पार्किंग स्थल; दोपहर में पीली स्कूल बसों की भीड़ ने भी बढ़ाई मुश्किलें

कटनी। शहर की यातायात व्यवस्था इन दिनों ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जिसमें सड़क पर चलने से ज्यादा मुश्किल सड़क से निकलना हो गया है। कहीं ई-रिक्शा की बेतरतीब आवाजाही, कहीं बीच सड़क पर सवारी बैठाने और उतारने की होड़, तो कहीं सड़क किनारे खड़े वाहनों का कब्जा। इन सबके बीच आम नागरिक, व्यापारी, दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर रोजाना जाम की परेशानी झेलने को मजबूर हैं। शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव अब सामान्य समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बनता जा रहा है।

मिशन चौक से जगन्नाथ चौक के बीच दोपहर में रोजाना घंटों तक यातायात बुरी तरह प्रभावित रहने की स्थिति ने समस्या की गंभीरता उजागर कर दी। फ्लाईओवर के नीचे से लेकर मुख्य मार्ग तक चौपहिया वाहनों, ई-रिक्शा और दोपहिया वाहनों की कतारें लगी रहीं। वाहन चालकों को रेंगते हुए आगे बढ़ना पड़ा, जबकि पैदल राहगीरों के लिए सड़क पार करना भी मुश्किल हो गया। सवाल यह है कि जब शहर के व्यस्ततम मार्गों पर घंटों यातायात बाधित रहने की स्थिति बन रही है, तो यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाला अमला इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कर रहा है?

ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या, लेकिन संचालन की व्यवस्था कहां?

कटनी की सड़कों पर ई-रिक्शा की मौजूदगी अब इतनी व्यापक हो गई है कि शहर को ई-रिक्शा का शहर कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। लेकिन सवाल ई-रिक्शा चलने का नहीं, बल्कि उनके संचालन के तरीके और यातायात व्यवस्था का है। सार्वजनिक परिवहन का यह साधन आम लोगों के लिए सुविधाजनक जरूर है, परंतु यदि इसका संचालन बिना प्रभावी नियंत्रण के हो, तो सुविधा ही परेशानी का कारण बन जाती है।

मिशन चौक, जगन्नाथ चौक और आसपास के व्यस्त मार्गों पर सवारियां लेने के लिए अचानक वाहन रोक देना, एक के पीछे एक ई-रिक्शा खड़ा कर देना और चौराहों के आसपास अनियंत्रित ढंग से आवाजाही करना यातायात की रफ्तार को प्रभावित करता है। सड़क पर पहले से चल रहे वाहनों को निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती और देखते ही देखते जाम की स्थिति बन जाती है।

सबसे चिंताजनक पहलू वाहन चलाते समय चालक का ध्यान भटकना है। स्थानीय स्तर पर यह शिकायत भी सामने आती है कि कुछ चालक अपने परिचितों को बगल में बैठाकर बातचीत करते हुए वाहन चलाते हैं। यदि ऐसा करते समय चालक का ध्यान सड़क से हटता है, तो यह केवल यातायात नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि यात्रियों और अन्य राहगीरों की सुरक्षा से जुड़ा जोखिम है। ऐसे मामलों में नियमों के पालन और निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

आजाद चौक से मिशन चौक तक सड़क या पार्किंग स्थल?

शहर के बाजार क्षेत्रों में यातायात बाधित होने की एक प्रमुख वजह सड़क किनारे वाहनों की बेतरतीब पार्किंग भी बताई जा रही है। आजाद चौक से मिशन चौक के बीच यह समस्या विशेष रूप से परेशानी पैदा करती है। खरीदारी के लिए बाजार पहुंचने वाले लोग जब अपने वाहन सड़क किनारे खड़े कर देते हैं, तो पहले से सीमित सड़क का उपयोग करने के लिए उपलब्ध जगह और कम हो जाती है।

सड़क के दोनों ओर वाहन खड़े होने और बीच से गुजरने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने पर यातायात का प्रवाह बाधित होना तय है। ऐसे में सामने से आने वाले वाहन आमने-सामने फंस जाते हैं और पीछे लंबी कतार लग जाती है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब ई-रिक्शा और अन्य वाहन भी सवारी बैठाने के लिए उसी स्थान पर रुक जाते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बाजार क्षेत्र में नो-पार्किंग नियम केवल कागजों तक सीमित हैं? यदि नहीं, तो अव्यवस्थित पार्किंग पर नियमित और प्रभावी कार्रवाई का परिणाम सड़कों पर क्यों नजर नहीं आता? यातायात पुलिस की जिम्मेदारी केवल जाम लगने के बाद वाहनों को निकलवाना नहीं, बल्कि जाम की वजह बनने वाली परिस्थितियों पर पहले से नियंत्रण करना भी है।

तीन घंटे की परेशानी, जवाबदेही किसकी?

मिशन चौक से जगन्नाथ चौक तक रोजाना घंटों तक यातायात प्रभावित रहने की घटना ने यह स्पष्ट किया कि समस्या को केवल वाहन चालकों की लापरवाही बताकर खारिज नहीं किया जा सकता। सड़क पर वाहनों की संख्या, पार्किंग का दबाव, ई-रिक्शा संचालन, बाजार की भीड़ और स्कूल बसों की आवाजाही—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर यातायात प्रबंधन करना जरूरी है।

यदि एक प्रमुख मार्ग पर वाहनों का प्रवाह लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। बाजार पहुंचने वाले ग्राहक, दुकानदार, काम पर जाने वाले लोग, बुजुर्ग, बच्चे और जरूरी काम से निकलने वाले नागरिक भी प्रभावित होते हैं। आपात स्थिति में किसी मरीज को अस्पताल ले जाने वाले वाहन के लिए भी ऐसा जाम गंभीर चुनौती बन सकता है।

यहां सवाल किसी एक दिन की अव्यवस्था का नहीं, बल्कि बार-बार सामने आने वाली समस्या से निपटने की तैयारी का है। क्या इन मार्गों पर यातायात के दबाव का व्यवस्थित आकलन किया गया है? क्या जाम के प्रमुख बिंदु चिह्नित किए गए हैं? क्या व्यस्त समय में अतिरिक्त यातायात कर्मियों की तैनाती और पार्किंग नियंत्रण की नियमित समीक्षा होती है? इन सवालों के जवाब व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला सकते हैं।

दोपहर में पीली स्कूल बसों का दबाव, संकरी सड़कों पर बढ़ती चुनौती

कटनी की संकरी सड़कों पर दोपहर 1 से 2 बजे के बीच सैकड़ों की बड़ी संख्या में पीली स्कूल बसों की आवाजाही भी यातायात का दबाव बढ़ाती है। स्कूलों की छुट्टी के समय बसें शहर के अलग-अलग मार्गों से गुजरती हैं। इसी दौरान बाजारों में निजी वाहनों, ई-रिक्शा और दोपहिया वाहनों की आवाजाही भी बनी रहती है। परिणामस्वरूप कई मार्गों, तिराहों और चौराहों पर वाहनों का दबाव एक साथ बढ़ जाता है।

स्कूल बसें बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए आवश्यक हैं, लेकिन उनके संचालन के दौरान मार्ग और समय का उचित समन्वय भी उतना ही जरूरी है। यदि संकरे बाजार मार्गों पर एक ही समय में बड़ी संख्या में बसें और अन्य वाहन पहुंचेंगे, तो यातायात बाधित होने की आशंका बढ़ेगी।

इस समस्या का समाधान स्कूल बसों पर मनमाने प्रतिबंध लगाने में नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन, यातायात विभाग और जिला प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने में है। व्यस्त मार्गों के लिए उपयुक्त रूट, समय-सारणी और जरूरत के अनुसार यातायात कर्मियों की तैनाती से दबाव कम किया जा सकता है।

सड़कें नहीं बढ़ सकतीं तो व्यवस्था तो सुधारी जा सकती है!

कटनी की भौगोलिक बनावट और बाजार क्षेत्रों की सीमित सड़क चौड़ाई को देखते हुए हर मार्ग का चौड़ीकरण आसान नहीं है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि शहर को रोजाना जाम की समस्या के हवाले छोड़ दिया जाए। जब सड़कें सीमित हों, तब उपलब्ध सड़क का अनुशासित और प्रभावी उपयोग और भी जरूरी हो जाता है।

ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड, सवारी बैठाने और उतारने के निश्चित स्थान, बाजार क्षेत्रों में पार्किंग का नियमन, चौराहों के आसपास अतिक्रमण और अव्यवस्थित वाहन खड़े करने पर नियंत्रण तथा स्कूल बसों के लिए व्यावहारिक रूट प्लान—ये ऐसे कदम हैं, जिन पर प्रशासनिक स्तर पर काम किया जा सकता है।

इसके अलावा मिशन चौक, जगन्नाथ चौक और आजाद चौक जैसे प्रमुख बिंदुओं पर अलग-अलग समय में यातायात के दबाव का आकलन कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि जाम किस समय, किस दिशा और किन कारणों से अधिक लगता है। इसी आधार पर यातायात संचालन की योजना तैयार की जा सकती है।

केवल चालान से नहीं, नियमित निगरानी से सुधरेगी स्थिति

यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जिसका असर लगातार दिखाई दे। सड़क पर वाहन रोककर सवारी बैठाने, चौराहों के पास अनावश्यक रूप से वाहन खड़ा करने, गलत दिशा में चलने और निर्धारित पार्किंग नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही ई-रिक्शा चालकों को सुरक्षित संचालन और यातायात अनुशासन के प्रति जागरूक किया जाए।

व्यस्त मार्गों पर पीक आवर्स के दौरान नियमित निगरानी, जरूरत के अनुसार अतिरिक्त यातायात कर्मियों की तैनाती और जाम की स्थिति बनने पर त्वरित हस्तक्षेप भी आवश्यक है। बाजार क्षेत्रों में पार्किंग के लिए उपलब्ध स्थानों की पहचान कर नागरिकों को स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि सड़क को पार्किंग स्थल बनाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लग सके।

जिम्मेदारी तय होगी या जनता यूं ही जाम झेलती रहेगी?

कटनी में यातायात का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन अव्यवस्थित यातायात को स्थायी नियति मान लेना स्वीकार्य नहीं हो सकता। शहर में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या, बेतरतीब पार्किंग, संकरे मार्ग और स्कूल बसों की एक साथ आवाजाही जैसी चुनौतियां लंबे समय से ध्यान देने की मांग करती हैं। इनके समाधान के लिए किसी एक विभाग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी; नगर निगम, यातायात पुलिस, जिला प्रशासन और संबंधित स्कूल प्रबंधन को समन्वित प्रयास करने होंगे।

मिशन चौक से जगन्नाथ चौक तक घंटों प्रभावित यातायात और आजाद चौक से मिशन चौक के बीच पार्किंग का दबाव व्यवस्था के सामने स्पष्ट चुनौती है। अब जरूरत केवल जाम खुलवाने की नहीं, बल्कि उन कारणों को दूर करने की है जो बार-बार जाम पैदा करते हैं।

**आम नागरिकों का सवाल सीधा है—जब समस्या रोज सामने आ रही है, तो समाधान के लिए ठोस व्यवस्था कब बनेगी?** कटनी की जनता को ऐसी यातायात व्यवस्था चाहिए, जिसमें सड़क पर निकलना किसी परीक्षा से कम न हो और शहर के प्रमुख मार्गों पर कुछ किलोमीटर का सफर घंटों की परेशानी में न बदले। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो बढ़ते वाहनों और सीमित सड़कों के बीच यह समस्या और गंभीर हो सकती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस चुनौती को गंभीरता से लेकर व्यवस्था सुधारते हैं या कटनीवासी रोजाना जाम में फंसकर जवाबदेही का इंतजार करते रहेंगे।

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