
समय पर उपचार से जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैर की समस्या हो सकती है दूर, विशेषज्ञों ने अभिभावकों को दी नियमित उपचार की सलाह
कटनी। जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैर यानी क्लबफुट की समस्या से जूझ रहे बच्चों के लिए जिला चिकित्सालय कटनी में विशेष निःशुल्क क्लबफुट शिविर आयोजित किया गया। शिविर में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे बच्चों की विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच की गई। इस दौरान कुल 38 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई, जबकि उपचार की आवश्यकता वाले 2 बच्चों का Ponseti Technique के तहत प्लास्टर किया गया। वहीं उपचार के बाद पैर की स्थिति को सही बनाए रखने के लिए 20 बच्चों को विशेष क्लबफुट शूज यानी ब्रेसेज निःशुल्क वितरित किए गए।शिविर का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह ठाकुर एवं सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा के मार्गदर्शन में किया गया। हड्डी रोग विशेषज्ञों ने बच्चों के पैरों की बनावट, स्थिति और उपचार की आवश्यकता का परीक्षण किया तथा अभिभावकों को उपचार की प्रक्रिया और नियमित फॉलोअप के संबंध में जानकारी दी।
38 बच्चों की हुई स्क्रीनिंग शिविर में कुल 38 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रत्येक बच्चे के पैर की स्थिति का परीक्षण करते हुए आवश्यक उपचार और परामर्श दिया। इनमें से दो बच्चों के उपचार की शुरुआत प्लास्टर लगाने से की गई। वहीं 20 बच्चों को उपचार के अगले चरण में उपयोग किए जाने वाले क्लबफुट शूज/ब्रेसेज उपलब्ध कराए गए।क्लबफुट के उपचार में शुरुआती पहचान और नियमित उपचार को महत्वपूर्ण माना जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के RBSK कार्यक्रम में क्लबफुट को जन्मजात विकृतियों की श्रेणी में शामिल किया गया है और इसके लिए जिला स्तर पर उपचार एवं रेफरल की व्यवस्था का प्रावधान है।Ponseti तकनीक से शुरू हुआ उपचारशिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ठाकुर एवं डॉ. अभिषेक चौरसिया ने बच्चों की जांच कर उपचार और परामर्श प्रदान किया। दो बच्चों का प्रथम चरण में प्लास्टर किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार Ponseti पद्धति में पैर को धीरे-धीरे सही स्थिति में लाने के लिए क्रमिक रूप से प्लास्टर लगाया जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की सामग्री के मुताबिक क्लबफुट के उपचार में शुरुआती चरण में मैनिपुलेशन और कास्टिंग की जाती है तथा इसके बाद ब्रेसेज का उपयोग उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।20 बच्चों को दिए गए निःशुल्क ब्रेसेजशिविर के दौरान 20 बच्चों को क्लबफुट शूज/ब्रेसेज निःशुल्क वितरित किए गए। विशेषज्ञों ने अभिभावकों को समझाया कि केवल प्लास्टर के बाद उपचार समाप्त नहीं होता, बल्कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्रेसेज का नियमित उपयोग भी जरूरी होता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार Ponseti पद्धति में ब्रेसेज दोबारा विकृति आने की संभावना कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
RBSK में क्लबफुट शामिल क्लबफुट को भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत चिन्हित 30 स्वास्थ्य स्थितियों में शामिल किया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकृतियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जल्दी पहचान, उपचार और प्रबंधन करना है। RBSK के दिशा-निर्देशों में क्लबफुट के लिए नवजात अवस्था में पहचान और जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल/DEIC से उपचार की व्यवस्था का उल्लेख है।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने क्लबफुट की शीघ्र पहचान और Ponseti पद्धति से शुरुआती उपचार पर विशेष जोर दिया है। इसके तहत नवजात बच्चों की स्क्रीनिंग के दौरान क्लबफुट की पहचान कर उचित उपचार के लिए रेफर करने की व्यवस्था बताई गई है।DEIC और स्वास्थ्य टीम की रही सहभागिताशिविर में RBSK AMO डॉ. दीपम खरे, जिला चिकित्सालय स्थित DEIC केंद्र से श्रीमती मालती तिवारी एवं श्रीमती आभा नामदेव सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारियों ने सेवाएं दीं। बच्चों की स्क्रीनिंग, अभिभावकों की काउंसलिंग और उपचार संबंधी प्रक्रिया में स्वास्थ्य टीम ने सहयोग किया।शिविर का सफल संयोजन अनुष्का फाउंडेशन (SBI फाउंडेशन) के प्रतिनिधि अमित सोनी द्वारा किया गया।
समय पर उपचार से बच्चा सामान्य रूप से चल सकता है चिकित्सकों ने बताया कि क्लबफुट जन्मजात पैर की विकृति है, लेकिन इसे समय रहते पहचानकर उचित उपचार कराया जाए तो बच्चे के पैर को काफी हद तक सामान्य स्थिति में लाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की सामग्री में भी क्लबफुट की शुरुआती पहचान और उपचार को महत्वपूर्ण बताया गया है तथा उपचार में देरी होने पर स्थायी विकलांगता का जोखिम बताया गया है।विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की कि यदि नवजात या छोटे बच्चे के पैर का आकार असामान्य दिखाई दे, पैर अंदर की ओर मुड़ा हो या पैर की स्थिति सामान्य न लगे तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे मामलों में जल्द से जल्द जिला चिकित्सालय के DEIC सेंटर में संपर्क कर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेना चाहिए।
शिविर के प्रमुख आंकड़े- 38 बच्चों की क्लबफुट स्क्रीनिंग- 2 बच्चों का प्रथम चरण में प्लास्टर- 20 बच्चों को निःशुल्क क्लबफुट शूज/ब्रेसेज- Ponseti Technique से उपचार की शुरुआत- RBSK और DEIC टीम की सहभागिता- हड्डी रोग विशेषज्ञों द्वारा जांच एवं उपचार संबंधी परामर्शस्वास्थ्य विभाग की इस पहल से क्लबफुट से प्रभावित बच्चों को समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिलने के साथ अभिभावकों में भी जन्मजात पैर की विकृति को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
