
विजयराघवगढ़। धर्म, आस्था और भक्ति के अद्भुत संगम के बीच गौरहा स्थित हनुमानजी मंदिर प्रांगण में मंगलवार को नौ दिवसीय भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के साथ हुआ। कथा प्रारंभ होते ही संपूर्ण क्षेत्र श्रीराममय हो उठा तथा श्रद्धालुओं के मुख से गूंजते जय श्रीराम के उद्घोषों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा स्थल पर क्षेत्रभर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
कथा के शुभारंभ अवसर पर सिद्धनधाम लोढ़ा पहाड़ के कथा व्यास पूज्य महंत स्वामी सीताराम शरण जू महाराज का नगरवासियों द्वारा भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया गया। महाराज श्री को आकर्षक रूप से सुसज्जित झांकी में विराजमान कर हजारों श्रद्धालुओं एवं महिलाओं द्वारा सिर पर कलश धारण कर विशाल कलश शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कथा स्थल तक पहुंची। मार्ग के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं एवं सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर कथा व्यास का अभिनंदन किया। पूरे नगर में जय श्रीराम, सीताराम और हनुमानजी महाराज के जयघोषों से वातावरण गुंजायमान रहा।
श्रीराम कथा महोत्सव को लेकर नगर में विशेष तैयारियां की गई थीं। आयोजन को सफल बनाने में नगर परिषद अध्यक्ष राजेश्वरी हरीश दुबे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके निर्देशन में नगर के प्रमुख मार्गों की विशेष साफ-सफाई कराई गई, सड़कों पर जल छिड़काव कराया गया तथा चुने की आकर्षक बॉर्डर बनाकर मार्गों को सजाया गया। नगर में विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत द्वार स्थापित किए गए तथा श्रीराम नाम से युक्त बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाकर कथा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।
कथा के प्रथम दिवस महंत स्वामी सीताराम शरण जी महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता जानकी एवं भक्त शिरोमणि श्री हनुमानजी के दिव्य चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर दिखाई दिए। महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल अयोध्या के राजा नहीं थे, बल्कि वे आदर्श जीवन के महान प्रेरणास्रोत हैं। उनका संपूर्ण जीवन मानव समाज के लिए अनुकरणीय है।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम भक्तों के मन-मंदिर में निवास करते हैं और उनका जीवन परिवार, समाज तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों के निर्वहन की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीराम ने मनुष्य रूप में अवतार लेकर संसार को मर्यादा, धैर्य, त्याग, पराक्रम, सत्यनिष्ठा और संस्कारों का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में मनुष्य को केवल शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि बुद्धिमान, संयमी और धैर्यवान भी होना चाहिए। श्रीराम का चरित्र हमें सिखाता है कि परिवार की रक्षा, समाज की सेवा और अधर्म के विनाश के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
महाराज श्री ने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में राम के आदर्शों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि व्यक्ति श्रीराम के चरित्र को आत्मसात कर ले तो उसके जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः हो सकता है। कथा के दौरान भजनों एवं संगीतमय प्रस्तुतियों ने भी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
श्रीराम कथा के शुभारंभ के साथ ही पूरे क्षेत्र में भक्ति एवं आध्यात्मिकता की ऐसी अलौकिक धारा प्रवाहित हुई, जिसमें श्रद्धालु भावविभोर होकर डूबते नजर आए। कथा स्थल पर उमड़ी श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ इस बात का प्रमाण रही कि आज भी जन-जन के हृदय में प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और भक्ति विद्यमान है। आगामी दिनों में कथा के विभिन्न प्रसंगों का रसपान कराने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
