आत्मदाह की चेतावनी के बीच 12वें दिन अनशन पर लगा विराम

केंद्रीय टीम पहुंची अनशन स्थल, सांसद से मोबाइल पर कराई अनशनकारियों की बातचीत; ज्ञापन संसद में रखने का मिला आश्वासन

अनशनकारियों ने कहा—यह पूर्ण विराम नहीं, केवल अल्पविराम; जरूरत पड़ी तो फिर होगा बड़ा आंदोलन

कटनी। यूजीसी कानून के विरोध में पिछले 12 दिनों से अन्न त्यागकर चल रहा अनशन शुक्रवार को उस समय समाप्त हो गया, जब केंद्र सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल अनशन स्थल पर पहुंचा और अनशनकारियों से संवाद कर उनकी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। खास बात यह रही कि अनशनकारियों द्वारा इसी दिन आत्मदाह की चेतावनी भी दी गई थी। ऐसे में केंद्रीय टीम के पहुंचने और मिले आश्वासन के बाद आंदोलन ने फिलहाल विराम ले लिया।अनशन के 12वें दिन सुबह से ही आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। मंच से विभिन्न वक्ताओं ने अपनी-अपनी ओजस्वी वाणी में यूजीसी कानून के विरोध में अपने विचार रखे और उपस्थित लोगों को संबोधित किया। आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी। अनशन स्थल पर पुलिस बल के साथ निजी बाउंसर्स की तैनाती भी देखी गई।करीब एक बजे पहुंची केंद्रीय टीमइसी बीच दोपहर करीब एक बजे उस समय आंदोलन स्थल पर हलचल बढ़ गई, जब केंद्र सरकार की ओर से टीम के पहुंचने की सूचना मिली। कुछ ही देर बाद केंद्रीय टीम भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सोनी टंडन के साथ अनशन स्थल पर पहुंची। टीम का अनशनकारियों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। प्रतिनिधियों ने अनशनकारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं और मांगें सुनीं। इस दौरान अनशनकारियों ने अपनी पीड़ा प्रतिनिधिमंडल के समक्ष रखी तथा यूजीसी कानून तथा आरक्षण के मूलभूत ढाँचे में सुधार की बात को लेकर अपनी आपत्तियों और मांगों से अवगत कराया, जिसमें इस कानून के तहत किसी हरिजन व्यक्ति के द्वारा की गई झूठी शिकायत पर तुरंत गिरफ्तारी तथा पीड़ित को मुआवजे के तौर पर बारह लाख देने के प्रावधान को तत्काल बंद करने तथा उसकी शिकायत की जाँच सक्षम अधिकारी से कराए जाने का बिंदु भी शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसा गलत नियम अब कुछ लोगों का व्यापार बन चुका है। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे पिछले 12 दिनों से अन्न त्यागकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन किसी जनप्रतिनिधि का स्थल पर नहीं पहुंचना सवर्णों के लिए अत्यंत विचारणीय विषय है, जिसका असर भी आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा।

सांसद ने मोबाइल पर अनशनकारियों से की बात

भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सोनी टंडन ने स्थानीय सांसद से मोबाइल फोन के माध्यम से अनशनकारियों की बातचीत कराई। उस समय सांसद बनारस में थे। मोबाइल पर हुई बातचीत के दौरान सांसद ने अनशनकारियों से कहा कि वे केंद्रीय टीम को अपना ज्ञापन सौंपें। उन्होंने आश्वासन दिया कि अनशनकारियों द्वारा दिया गया ज्ञापन केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा तथा आगामी सत्र में इस विषय को संसद में चर्चा के लिए भी उठाया जाएगा। सांसद के इस आश्वासन के बाद अनशनकारियों ने केंद्रीय टीम को अपना पक्ष और ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने उनकी बात सुनते हुए मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया।

12 दिन बाद कराया अन्न ग्रहण

केंद्रीय टीम के आश्वासन के बाद 12 दिनों से अन्न त्यागकर बैठे अनशनकारियों का अनशन समाप्त कराया गया। इस दौरान केंद्रीय टीम के सदस्यों, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सोनी टंडन तथा ब्राह्मण समाज के जिलाध्यक्ष राजू शर्मा ने अपने हाथों से अनशनकारियों को भोजन कराया।अन्न ग्रहण करने के साथ ही पिछले 12 दिनों से चल रहे अनशन पर फिलहाल विराम लग गया। इसके बाद मौजूद मीडिया कर्मियों ने केंद्रीय टीम और आंदोलन से जुड़े पदाधिकारियों से विभिन्न सवाल किए, जिनका उन्होंने जवाब दिया।

आत्मदाह की चेतावनी के बीच टला बड़ा कदम

गौरतलब है कि आंदोलनकारियों की ओर से अनशन के 12वें दिन आत्मदाह की चेतावनी दी गई थी। इसके चलते प्रशासन और पुलिस की निगाहें आंदोलन स्थल पर बनी हुई थीं। पुलिस बल के साथ निजी बाउंसर्स की मौजूदगी भी इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रही।हालांकि केंद्रीय टीम के आंदोलन स्थल पर पहुंचने, अनशनकारियों से संवाद करने तथा सांसद की ओर से ज्ञापन को केंद्र सरकार तक पहुंचाने और संसद में चर्चा कराने के आश्वासन के बाद आत्मदाह की चेतावनी वाला कदम आगे नहीं बढ़ा और आंदोलनकारियों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया।

आंदोलनकारियों ने बताया—अल्पविराम

अनशन समाप्त होने के बाद आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि इसे आंदोलन का पूर्ण विराम नहीं, बल्कि अल्पविराम माना जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद फिलहाल अनशन समाप्त किया गया है, लेकिन यदि भविष्य में उनकी मांगों पर अपेक्षित पहल नहीं हुई तो आंदोलन को फिर से व्यापक स्तर पर शुरू किया जा सकता है।आंदोलनकारियों ने कहा कि यूजीसी कानून को लेकर उनके भीतर जो असंतोष है, वह अभी समाप्त नहीं हुआ है। उनका कहना है कि आगामी समय में आवश्यकता पड़ने पर इससे भी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा और यूजीसी कानून की वापसी की मांग को व्यापक रूप से उठाया जाएगा।इस दौरान आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा कि पिछले 12 दिनों से चल रहे अन्न त्याग आंदोलन के दौरान सवर्ण समाज, क्षत्रिय समाज सहित अन्य हिन्दू समाज के लोगों का समर्थन उन्हें प्राप्त हुआ है। केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने और आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन को विराम दिया गया है, लेकिन आगे की दिशा सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगी।

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