कटनी नगर निगम परिषद की बैठक में हंगामा, आउटसोर्स भर्ती पर विधायक ने उठाए सवाल; पार्षद बल्ली सोनी ने सौंपा इस्तीफा

वार्ड की उपेक्षा और मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी से नाराज पार्षद ने महापौर पर लगाए निष्क्रियता के आरोप, अन्य पार्षदों ने भी जताई नाराजगी

कटनी। नगर निगम परिषद की बैठक में उस समय राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई, जब आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर मुड़वारा विधायक ने सवाल उठाए। वहीं, वार्ड की मूलभूत समस्याओं के निराकरण में कथित लापरवाही और विकास कार्यों की अनदेखी से नाराज सत्ता पक्ष के पार्षद ओमप्रकाश उर्फ बल्ली सोनी ने परिषद अध्यक्ष के समक्ष अपना इस्तीफा सौंप दिया। एक ही बैठक में भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल और सत्ता पक्ष के पार्षद की नाराजगी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।परिषद की बैठक में सामने आए इन घटनाक्रमों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सत्ता पक्ष के निर्वाचित पार्षद ही अपने वार्ड की समस्याओं के समाधान को लेकर असंतोष जाहिर कर रहे हैं, तो शहर के अन्य वार्डों में नागरिकों की शिकायतों का निराकरण किस तरह हो रहा होगा।

वार्ड की उपेक्षा से नाराज पार्षद ने सौंपा इस्तीफा

नगर निगम परिषद की बैठक में वार्ड क्रमांक 4 के पार्षद ओमप्रकाश उर्फ बल्ली सोनी का इस्तीफा चर्चा का प्रमुख विषय रहा। उन्होंने वार्ड की समस्याओं के समाधान में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाए जाने और आवश्यक विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए परिषद अध्यक्ष के सामने अपना इस्तीफा सौंप दिया। पार्षद बल्ली सोनी की नाराजगी का मुख्य कारण वार्ड में मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का लंबे समय से निराकरण नहीं होना बताया जा रहा है। उनका आरोप है कि वार्ड की जनता अपनी समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचती है और उनसे जवाब मांगती है। ऐसे में जब आवश्यक कार्यों को लेकर नगर निगम स्तर पर अपेक्षित पहल नहीं होती, तो जनता के बीच पार्षद की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े होते हैं।उन्होंने महापौर पर वार्ड के जरूरी कार्यों के प्रति निष्क्रियता बरतने और क्षेत्र की उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते वार्डवासियों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन आवश्यक कार्यों के लिए लगातार प्रयास करने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं मिलना निराशाजनक है।विकास शुल्क वसूली के बावजूद सुविधाओं का सवालपार्षद की नाराजगी के पीछे वार्ड की अनधिकृत कॉलोनियों में विकास शुल्क वसूले जाने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि क्षेत्र से भारी मात्रा में विकास शुल्क वसूला गया, लेकिन इसके अनुरूप नागरिकों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकीं। इस मुद्दे ने नगर निगम की विकास संबंधी प्राथमिकताओं और शुल्क वसूली के बाद उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी क्षेत्र के नागरिकों से विकास के नाम पर राशि ली जाती है, तो वहां बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और विकास कार्यों की स्थिति की समीक्षा भी जरूरी है। हालांकि, विकास शुल्क की कुल राशि, संबंधित कॉलोनियों की स्थिति और लंबित कार्यों का आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पार्षद के आरोपों ने नगर निगम प्रशासन के सामने वार्ड की समस्याओं के निराकरण को लेकर जवाबदेही का प्रश्न खड़ा कर दिया है।

आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया पर विधायक ने उठाए सवाल

परिषद की बैठक में दूसरा प्रमुख मुद्दा नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती का रहा। मुड़वारा विधायक ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की। विधायक ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों के परिवार से जुड़े लोगों को शामिल किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और भर्ती से संबंधित तथ्यों को सार्वजनिक करने की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्वालीफाइड डिग्री और डिप्लोमा प्राप्त युवाओं को भर्ती प्रक्रिया में किस प्रकार अवसर मिल रहा है। इसके साथ ही अन्य जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की भर्ती होने का मुद्दा उठाते हुए स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों के चयन के लिए क्या मापदंड निर्धारित किए गए थे, पात्रता का निर्धारण किस आधार पर हुआ और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था अपनाई गई। हालांकि, अधिकारियों के परिजनों को लाभ पहुंचाने और भर्ती में अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों की वास्तविक स्थिति चयन संबंधी अभिलेखों और आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

सत्ता पक्ष के पार्षदों की नाराजगी ने बढ़ाई चिंता

परिषद की बैठक में केवल इस्तीफे और आउटसोर्स भर्ती का मुद्दा ही नहीं, बल्कि वार्डों की मूलभूत समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों की नाराजगी भी सामने आई। पार्षदों का कहना है कि नागरिक पानी, सड़क, नाली और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए उनसे संपर्क करते हैं। समस्याओं का समय पर निराकरण नहीं होने पर जनता के सवालों का सामना जनप्रतिनिधियों को करना पड़ता है। ऐसे में यदि वार्डों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो जनप्रतिनिधियों और नगर निगम प्रशासन के बीच असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। बैठक के दौरान कुछ अन्य पार्षदों ने भी समस्याओं का निराकरण नहीं होने पर आगामी परिषद बैठक में इस्तीफा देने की बात कही।यदि यह नाराजगी आगे भी बनी रहती है, तो इसका असर नगर निगम परिषद की कार्यवाही और शहर के विकास से जुड़े मुद्दों पर पड़ सकता है। खास बात यह है कि असंतोष केवल विपक्ष तक सीमित दिखाई नहीं दिया, बल्कि सत्ता पक्ष के पार्षद ने भी अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर की।

महापौर और निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

पार्षद बल्ली सोनी के इस्तीफे और विधायक द्वारा भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर वार्डों में जरूरी सुविधाओं और विकास कार्यों को लेकर असंतोष है, तो दूसरी ओर कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।इन परिस्थितियों में नगर निगम प्रशासन के सामने दो महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। पहली, वार्डों में लंबित मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों की समीक्षा कर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना। दूसरी, आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों का तथ्यात्मक जवाब देकर पारदर्शिता कायम करना।नगर निगम प्रशासन यदि इन मुद्दों पर स्पष्ट स्थिति सामने लाता है और शिकायतों के निराकरण के लिए ठोस कदम उठाता है, तो नागरिकों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है।

अब आगे क्या होगा?

कटनी नगर निगम परिषद की बैठक में हुए घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पार्षद ओमप्रकाश उर्फ बल्ली सोनी के इस्तीफे पर परिषद अध्यक्ष और नगर निगम प्रशासन कोई निर्णय लेंगे? क्या वार्ड क्रमांक 4 में लंबित विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा कराई जाएगी? क्या महापौर इन आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करेंगी? और क्या आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को लेकर विधायक द्वारा उठाए गए सवालों की निष्पक्ष जांच होगी? फिलहाल, पार्षद के इस्तीफे और भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवालों ने कटनी नगर निगम की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अब निगाहें नगर निगम प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जनता को इंतजार है कि आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर वार्डों की समस्याओं का समाधान हो और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर भी तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाए।

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