वर्षों से अनदेखी बदहाल सड़क और दोषपूर्ण डिजाइन बनी हादसे की वजह

कटनी। कुठला थाना क्षेत्र अंतर्गत लमतरा ओवरब्रिज पर रविवार शाम हुए भीषण सड़क हादसे ने जिले में सड़क सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यात्री बस और ओवरलोड हाईवा के बीच हुई आमने-सामने की टक्कर में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब तीन दर्जन यात्री घायल हो गए। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस दर्दनाक दुर्घटना ने एक बार फिर उस ओवरब्रिज और मार्ग की खामियों को उजागर कर दिया है, जिनकी शिकायत स्थानीय लोग वर्षों से करते आ रहे हैं।
हादसे के बाद उठे सड़क की स्थिति पर सवाल
स्थानीय नागरिकों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस स्थान पर दुर्घटना हुई, वहां सड़क लंबे समय से क्षतिग्रस्त है। लमतरा ओवरब्रिज के निर्माण के कुछ समय बाद ही इसकी संरचना और सर्विस रोड को लेकर सवाल उठने लगे थे। तकनीकी खामियों और क्षतिग्रस्त हिस्सों के कारण सर्विस रोड को बंद कर दिया गया, लेकिन उसके स्थायी सुधार के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विजयराघवगढ़ मार्ग की यातायात व्यवस्था शुरू से ही अव्यवस्थित रही है। सड़क पर बने गड्ढे, संकरे मोड़, खराब एप्रोच रोड और दोषपूर्ण यू-टर्न व्यवस्था लगातार दुर्घटनाओं का कारण बनती रही है। इसके बावजूद संबंधित विभागों ने समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए।
अस्पताल में मची अफरा-तफरी
हादसे के बाद जिला अस्पताल में घायलों को लाने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए, जबकि घायलों का उपचार किया गया। गंभीर रूप से घायल एक महिला को जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहीं उपचार के लिए ले जाए जा रहे एक अन्य घायल ने रास्ते में दम तोड़ दिया।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने किया दौरा
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे तथा घायलों का हालचाल जाना। विधायक संदीप जायसवाल ने चिकित्सकों को घायलों के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।
सोमवार को विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक और सांसद वी.डी. शर्मा ने भी अधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने एप्रोच रोड और ओवरब्रिज की संरचनात्मक खामियों का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र कराने के निर्देश दिए।
कार्रवाई हुई, लेकिन क्या यही पर्याप्त है?
दुर्घटना के बाद प्रशासन और परिवहन विभाग ने संबंधित वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र एवं परमिट निरस्त करने तथा चालकों के लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई की है। हालांकि स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि केवल वाहन चालकों और परिवहन संबंधी औपचारिक कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा।
लोगों का कहना है कि वास्तविक जांच सड़क की गुणवत्ता, ओवरब्रिज की डिजाइन, निर्माण एजेंसी की भूमिका, तकनीकी स्वीकृतियों और वर्षों से लंबित मरम्मत कार्यों की भी होनी चाहिए। यदि सड़क और पुल की खामियां दुर्घटना का कारण बनी हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
सड़क सुरक्षा बैठकों के बावजूद क्यों नहीं हुआ सुधार?
गौरतलब है कि हाल ही में जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें दुर्घटनाओं की रोकथाम और यातायात सुरक्षा के उपायों पर चर्चा की गई थी। इसके बावजूद लमतरा ओवरब्रिज जैसे दुर्घटना संभावित और संवेदनशील स्थल की समस्याएं जस की तस बनी रहीं।
स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि वर्षों से जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और शासन के शीर्ष पदाधिकारी इस मार्ग से गुजरते रहे हैं, फिर भी पुल और सर्विस रोड की खामियों की ओर गंभीरता से ध्यान क्यों नहीं दिया गया। यदि समय रहते सुधार कार्य किए गए होते तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
भ्रष्टाचार या लापरवाही? जवाब चाहता है कटनी
क्षेत्रवासियों का मानना है कि लमतरा ओवरब्रिज और उससे जुड़ी सड़क व्यवस्था लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रही है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया गया और बाद में मरम्मत एवं रखरखाव को भी गंभीरता से नहीं लिया गया।
अब इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर लमतरा ओवरब्रिज, उसकी सर्विस रोड और एप्रोच रोड की बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या जांच केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगी या फिर सड़क निर्माण और रखरखाव में हुई संभावित लापरवाहियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई भी होगी?
चार लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने के बाद कटनी की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जवाबदेही और स्थायी समाधान की मांग कर रही है।
