
भारी वाहनों की जांच के नाम पर निजी लोगों की तैनाती का दावा, शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से वाहन चालकों में आक्रोश
कटनी। शहर के झिंझरी जेल के समीप संचालित यातायात चेक प्वाइंट एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। ट्रक चालकों और स्थानीय लोगों ने यहां ट्रैफिक जांच के नाम पर कथित अवैध वसूली किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सरकारी चेकिंग व्यवस्था में निजी व्यक्तियों की सक्रिय भूमिका कई सवाल खड़े कर रही है।
आरोप है कि प्रतिदिन सुबह लगभग 6 बजे से रात 10 बजे तक भारी वाहनों को रोककर उनकी जांच की जाती है। इस दौरान सड़क पर मौजूद निजी व्यक्तियों द्वारा ट्रकों को रुकवाया जाता है और वाहन चालकों से कथित रूप से अवैध रूप से राशि वसूली जाती है। ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह कथित वसूली पिछले करीब छह महीनों से लगातार जारी है। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी देने के बावजूद न तो जांच की गई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हुई। इससे वाहन चालकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
ट्रक चालकों का कहना है कि जांच के नाम पर उन्हें बेवजह रोका जाता है, जिससे माल परिवहन प्रभावित होता है और समय के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। उनका आरोप है कि यदि कोई चालक आपत्ति जताता है तो उसे अनावश्यक रूप से अधिक देर तक रोककर परेशान किया जाता है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि आरोप सही हैं, तो सरकारी यातायात जांच में निजी व्यक्तियों की भूमिका किस नियम के तहत तय की गई है। साथ ही यह भी प्रश्न उठ रहा है कि लगातार शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा इस मामले में ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
वाहन चालकों, ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन एवं पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, चेक प्वाइंट की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
