
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी की बकाया पेशेवर फीस का भुगतान करने का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को 78.65 लाख रुपये की मूल बकाया राशि के साथ 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करने के निर्देश दिए हैं। यह फीस सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से एक मामले में पैरवी करने के लिए देय थी।
मामले की सुनवाई जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दलील दी गई कि वरिष्ठ अधिवक्ता केवल दो अवसरों पर अदालत में पेश हुए थे, इसलिए उनके द्वारा दावा की गई पूरी फीस उचित नहीं है।
हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने न्यायिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए पाया कि वरिष्ठ अधिवक्ता कुल 14 तारीखों पर मामले में पेश हुए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ अधिवक्ता की पेशी एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के निर्देश पर ही न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज होती है।
अदालत ने कहा कि न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज पेशी को महज दलील के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पीठ ने रिकॉर्ड में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर वरिष्ठ अधिवक्ता की फीस के दावे को स्वीकार करते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।
आदेश के मुताबिक, राज्य सरकार को 78 लाख 65 हजार रुपये की मूल राशि के अलावा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इस फैसले के साथ हाई कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता की पेशी और पेशेवर फीस से जुड़े विवाद में न्यायिक रिकॉर्ड की प्रमाणिकता को महत्वपूर्ण माना है।
